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हारे हुए नेता - ओशो

हारे हुए नेता जी .......... -ओशो  अभी मैंने सुना कि जब जनता पार्टी हार गई और जनता पार्टी के नेता सब बेकार हो गए और हालत उनकी खस्ता हो गई--गए सब पद ,  गए सब बंगले ,  गई सब कारें ,  लूट-खसोट के सब अवसर भी गए--तो जगह-जगह तलाश करने लगे काम की। और राजनेताओं को कौन काम दे! लोग वोट दे देते हैं कि लो भई वोट ले लो , सार्वजनिक संपत्ति को लूटो ,  मगर काम पर अपने घर में कौन रखे! राजनेता को कोई अपने घर में रखेगा काम पर ,  क्या हरकत करे क्या पता! कोई काम देने को राजी नहीं। तो एक राजनेता ,  सरकस आई थी ,  उसमें चला गया। सरकस के मैनेजर से कहा कि अब तो बहुत हालत हो रही है ,  कड़की की हालत हो गई है। कोई न कोई काम चाहिए। उसने कहा ,  भाई और तो कोई काम नहीं है , हमारा सिंह मर गया है ,  तो उसकी खाल निकाल कर रख ली है ,  तुम उसमें प्रवेश कर जाओ। और तुम्हारे साथ में हम टेप-रिकार्डर दे देते हैं ,  सो अंदर से ही समय-समय पर टेप-रिकार्डर ,  अपने आप ,  आटोमेटिक है हुंकार भरेगा। इसमें रेकार्ड की हुई है सिंह की हुंकार। सो यह जब हु...

नरक और नेता - ओशो

आपुई गई हिराय-(प्रश्नत्तोर)-प्रवचन-01 आपुई गई हिराय-(प्रश्नत्तोर)-ओशो दिनांक 0 1 -फरवरी ,  सन् 1981 , ओशो आश्रम ,  पूना। प्रवचन-पहला  –( नी सईयो मैं गई गुवाची) मोरारजी देसाई और नर्क— मोरारजी देसाई जब इस प्‍यारी दुनियां से चल बसे ,  तब उन्‍होंने सोचा की हो-न-हो मुझे तो जरूर ही स्‍वर्ग में जगह मिलेगी। पर ये स्‍वर्ग दिल्‍ली तो नहीं था। न ही वहां दिल्‍ली की कोई साठ गांठ ही चल सकती थी। पहुंच गये नर्क में। शैतान ने कहा कि आप ऐसे भले आदमी है , खादी पहनते है। और एक कुर्ता भी मोरारजी देसाई दो दिन पहनते है। इसलिए जब वह बैठते है ,  कुर्सी पर तो पहले कुरते को दोनों तरफ से उठा लेते है। क्‍या बचत कर रहे है ,  अरे गरीब देश है ,  बचत तो करनी ही पड़ेगी। इस तरह एक दफा और लोहा करने की बचत हो जाती है। पहले  दोनों पुछल्ला ऊपर उठा कर बैठ गए , ताकि सलवटें न पड़े। सिद्ध पुरूष है ,  चर्खा हमेशा बगल में दबाए रखते है। चलाएँ या न चलाए। शैतान ने कहा कि और आप काम ऊंचे करते रहे ,  गजब के काम करते रहे ,  तो आपको हम ...

Rajneesh Osho rare photos collection

Collection of Some Rare Photos of Rajneesh Osho :- Osho With Members of his Family Osho In Oregon USA : Death Of Osho's Father : Osho in Oregon :- Join  Our YouTube Channel :-  Spiritual Journey osho More Photos Of Osho  👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 Osho Pictures 5 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

प्यास और संकल्प | ध्यान सूत्र - ओशो

संकल्प कैसे लें - ओशो 1. सबसे पहली बात ,  सबसे पहला सूत्र , जो स्मरण रखना है ,  वह यह कि आपके भीतर एक वास्तविक प्यास है ?  अगर है ,  तो आश्वासन मानें कि रास्ता मिल जाएगा। और अगर नहीं है , तो कोई रास्ता नहीं है। आपकी प्यास आपके लिए रास्ता बनेगी। 2. दूसरी बात ,  जो मैं प्रारंभिक रूप से यहां कहना चाहूं ,  वह यह है कि बहुत बार हम प्यासे भी होते हैं किन्हीं बातों के लिए ,  लेकिन हम आशा से भरे हुए नहीं होते हैं। हम प्यासे होते हैं , लेकिन आशा नहीं होती। हम प्यासे होते हैं , लेकिन निराश होते हैं। और जिसका पहला कदम निराशा में उठेगा ,  उसका अंतिम कदम निराशा में समाप्त होगा। इसे भी स्मरण रखें , जिसका पहला कदम निराशा में उठेगा ,  उसका अंतिम कदम भी निराशा में समाप्त होगा। अंतिम कदम अगर सफलता और सार्थकता में जाना है ,  तो पहला कदम बहुत आशा में उठना चाहिए। 3. तीसरी बात ,  साधना के इन तीन दिनों में आपको ठीक वैसे ही नहीं जीना है ,  जैसे आप आज सांझ तक जीते रहे हैं। मनुष्य बहुत कुछ आदतों का यंत्र है। और अगर मनुष्य अपनी पुरान...

पति और पत्नी का संबंध और प्रेम - ओशो

मराैै है जोगी मरौ-(प्रवचन-08) आओ चाँदनी को बिछाएं ,  ओढ़े— प्रवचन—आठवां 8 अक्‍टूबर ,  1978 ; श्री रजनीश आश्रम ,  पूना। आखिरी प्रश्न : मैं अपनी पत्नी के अतिरिक्त अन्य स्त्रियों में भी उत्सुक हो जाता हूं लेकिन जब मेरी पत्नी किसी पुरुष में उत्सुकता दिखाती है तो मुझे बड़ी ईर्ष्या होती है भयंकर अग्नि में मैं जलता हूं। पु रुषों ने सदा से अपने लिए सुविधाएं बना रखी थीं ,  स्त्रियों को अवरुद्ध कर रखा था। पुरुषों ने स्त्रियों को बंद कर दिया था मकानों की चार दीवारों में ,  और पुरुष ने अपने को मुक्त रख छोड़ा था। अब वे दिन गए। अब तुम जितने स्वतंत्र हो ,  उतनी ही स्त्री भी स्वतंत्र है। और अगर तुम चाहते हो कि ईर्ष्या में न जलों तो दो ही उपाय हैं। एक तो उपाय है कि तुम स्वयं भी वासना से मुक्त हो जाओ। जहा वासना नहीं वहां ईर्ष्या नहीं रह जाती। और दूसरा उपाय है कि अगर वासना से मुक्त न होना चाहो तो कम—से—कम जितना हक तुम्हें है ,  उतना हक दूसरे को भी दे दो। उतनी हिम्मत जुटाओ। मैं तो चाहूंगा कि तुम वासना से मुक्त हो जाओ। एक स्त्री जा...

धन्यभागी हो , कृतज्ञ हो - ओशो ।

मराैै है जोगी मरौ-(प्रवचन-16) नयन   मधुर   आज   मेरे — प्रवचन — सोलहवां    दिनांक: 16 नवंबर ,  1978 ; श्री रजनीश आश्रम ,  पूना। धन्यभागी हो। इस धन्यवाद को प्रगट करना ,  अनेक— अनेक रूपों में ;  पर भूलकर भी ,  अनजान में भी ,  अचेतन में भी ,  अस्मिता को मत उठने देना। नयन मधुकर आज मेरे एक अनजानी किरण ने गुदगुदी उर में मचा दी , फूट प्राणों से पड़ा गुंजन सबेरे ही सबेरे! नयन मधुकर आज मेरे! दूर की मधुगंध पागल प्यास प्राणों में जगा दी विश्व—मधुवन में लगाता फिर रहा मैं लाख फेरे! नयन मधुकर आज मेरे!             ये पलक—पांखें नशे में झप रही हैं ,  खुल रही हैं पुतलियां मदहोश—सी हैं , कंटकों को कौन हेरे! नयन मधुकर आज मेरे! दूर कुंजों की कली! मुझसे नयन मेरे न छीनो! तुम न घेरे हो इन्हें ,  पर है तुम्हारा रूप घेरे! नयन मधुकर आज मेरे! आंखें तुम्हारी भरने लगीं हैं दूर के प्रकाश से ,  पहली किरण आयी है। और...